Tuesday April 24, 2018
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खैरालिंग महादेव, मुण्डनेश्वर सतपुली

खैरालिंग महादेव, मुण्डनेश्वर सतपुली
खैरालिंग महादेव, मुण्डनेश्वर सतपुलीखैरालिंग महादेव, मुण्डनेश्वर सतपुलीखैरालिंग महादेव, मुण्डनेश्वर सतपुली

मण्डल मुख्यालय पौड़ी से लगभग ३७ किमी दूर कल्जीखाल विकासखण्ड के अन्तर्गत खैरालिंग महादेव समुद्रतल से १८०० मीटर की ऊंचाई पर एक रमणीक एवम सुरम्य पहाडी पर स्थित है। खैरालिंग महादेव को मुण्डनेश्वर महादेव भी कहा जाता है। इन्हें धवड़िया देवता के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि जिस पर्वत चोटी पर श्री खैरालिंग महादेव का मन्दिर स्थापित है वह मुण्ड (सिर) के आकार का उभरा हुआ है। तीन ओर से जो पर्वत श्रृखंलायें यहां आकर मिलती हैं वह घोड़े की पीठ के समान सम होकर चली हैं और उनके मिलन स्थल पर सिर के रुप की आकृति बन गई है जिसे मुण्डन डांडा भी कहा जाता है। और इसी के आधार पर इसे मुण्डनेश्वर भी कहा गया है। इस मन्दिर की स्थापना १७९५ ईसवी में की गई थी। मन्दिर में स्थापित लिंग खैर के रंग का है अत: इसे खैरालिंग कहा जाता है।

मान्यता है कि खैरालिंग के तीन भाई और भी हैं, ताड़केश्वर, एकेश्वर और विन्देश्वर (विनसर), इनकी एक बहन काली भी है जो कि खैरालिंग के साथ रहती है। वहीं खैरालिंग मन्दिर में काली का थान भी है। भगवान शिव कभी भी बलि नही लेते हैं लेकिन खैरालिंग मंदिर में बलि दी जाती है, इस संबन्ध में कहा जाता है कि खैरालिंग के साथ काली भी है इसी लिये यहां बलि दी जाती है। यहां प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास में मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें पशुबलि दी जाती है। दो दिन के इस मेले में पहले दिन ध्वजा चढ़ाई जाती है, तथा दूसरे दिन बलि दी जाती है।

खैरालिंग कौथीग मेले का अनुष्ठान मेले से ९ दिन पहले शुरू हो जाता है। ९ दिन तक रात को होने वाला यह अनुष्ठान अलौकिक होता है। वर्तमान समय में मन्दिर का जो स्वरूप उभर कर सामने आया है वह गढ़वाली वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। शैव के साथ शाक्त मतवलंबियों की समान रूप से सहभागिता बनी रहे इस उद्देश्य से भगवान शंकर के साथ शक्ति के रूप में मां काली की स्थापना की गई है। शिवालय में बैल नन्दी की सवारी करते भगवान शंकर की पत्थर की मूर्ति भी स्थापित की गई है। मन्दिर के बाहर दीवार पर मां काली की मूर्ति उकेरी गई है। काली मां की मूर्ति कुछ खण्डित अवस्था में है। माना जाता है कि उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में सन १८०३ से १८१५ तक जब गढ़वाल गोरखाओं के आधीन था उस समय गोरखालियों द्वारा यह मूर्ति खण्डित की गई थी मन्दिर का शांत व शीतल स्थान बड़ा ही रमणीक है। सिद्धपीठ लंगूरगढ़ी, एकेश्वर महादेव, विन्सर महादेव, रानीगढ़, दूधातोली, जड़ाऊखांद, दीवाडांडा, ताड़केश्वर महादेव और विस्तृत हिमालय यहां से दृष्टिगोचर होता है।



फोटो गैलरी : खैरालिंग महादेव, मुण्डनेश्वर सतपुली

Comments

1

madhu bala rawat | June 28, 2016
jai ho khairaling ki

2

dalbir singh negi | August 16, 2015
Khairaling mahadev hamare isht dev hain mera sat sat naman

3

vipin rana | October 02, 2014
this mandir is very good jai ho kharling mahadev

4

DHANVEER NEGI | May 08, 2014
nice

5

Ajay Bhatt | April 07, 2014
kharling mhadev ki jai ho

6

P s patwal | September 05, 2013
Kharaling near mudnashwar block kaljikhal

7

tajwat | July 17, 2013
jai ho khairaling

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