Monday February 26, 2018
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चमोली

जनपद चमोली अपने कई सुरम्य हिल-स्टेशन, बर्फ से ढके पर्वतों और धार्मिक आस्था से जुड़े तीर्थस्थानों के साथ एड्वेन्चर ट्रैकिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। चमोली की प्राकृतिक सुन्दरता पर्यटकों के अपनी ओर आकर्षित करती है इसी लिये यहां काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ साथ इस जनपद में रोमांचक व साहसिक पर्यटन के कई विकल्प मौजूद हैं। यह जनपद लगभग ७६९२ वर्ग किमी० के भौगोलिक क्षेत्रफल में समुद्रतल से ९६० मीटर की ऊंचाई पर बसा है। वर्ष २०११ की जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जनपद का जनसंख्या घनत्व ४९ व्यक्ति प्रति वर्ग किमी०, साक्षरता दर  ८३.४८% (पुरुष : ९४.१८%, महिला : ७३.३०%)  तथा लिंगानुपात १०००:१०२१ है। जनपद के पूर्व में पिथौरागढ़ तथा बागेश्वर, दक्षिण में अल्मोड़ा, दक्षिण-पश्चिम में पौड़ी, पश्चिम में रूद्रप्रयाग, उत्तर-पश्चिम में उत्तरकाशी तथा उत्तर में तिब्बत इसकी सीमायें निर्धारित करते हैं। समुद्रतल से लगभग १३०८ मीटर की ऊंचाई पर बसा गोपेश्वर नगर जनपद का मुख्यालय है। प्रशासनिक दृष्टि से यह जनपद ६ तहसीलों (जोशीमठ, कर्णप्रयाग, थराली, गैर, चमोली तथा पोखरी) एवं नौ सामुदायिक विकासखण्डों (देवराड़ा, देवल, गौचर, घाट, जोशीमठ, कर्णप्रयाग, नन्दप्रयाग, पोखरी तथा थराली) में विभाजित है। चमोली पहले ब्रिटिश शासनकाल में ब्रिटिश गढ़वाल (पौड़ी जनपद) की एक तहसील हुआ करती थी जिसे २४ फरवरी १९६० को अलग जनपद के रूप में गठित कर दिया गया था।

मध्य हिमालय के बीच में स्थित चमोली जनपद में कई ऐसे मन्दिर हैं जो कि हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आने वाले पर्यटकों को रहने की सुविधा देने हेतु इस क्षेत्र में कई होटल, लाज तथा धर्मशालायें मौजूद हैं परन्तु इन सबसे अलग यहां पायी जाने वाली "चाती" का अपना ही महत्व है। कम कीमत पर पहाड़ी परिवेश जैसी सुविधायें देने वाली यह "चातियां" एक प्रकार की झोपड़ियां होती हैं जो कि अलकनन्दा के तट पर स्थित होती है। विश्वप्रसिद्ध मन्दिर "बद्रीनाथ" व गुरूद्वारा "हेमकुन्ड साहिब" चमोली जनपद में ही हैं। इनके अलावा अनुसूया देवी, रुद्रनाथ, कल्पेश्वरनाथ, वृद्ध-बदरी, भविष्य-बदरी, योगध्यान-बदरी  विष्णुप्रयाग, नन्दप्रयाग आदि-बदरी इसी जनपद में आते हैं। फूलों की घाटी, औली, कौड़ी-पास जैसे पर्यटक स्थल चमोली जनपद में ही स्थित हैं। उत्तराखण्ड का महाकुम्भ कहे जाने वाले "नन्दा राज जात" सांस्कृतिक व धार्मिक महापर्व का अयोजन चमोली जनपद में ही होता है। २६ मार्च १९७४ को वनो को काटकर प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट करके प्राकृतिक संतुलन  खराब करने के विरोध में जन्मा चिपको आन्दोलन चमोली जनपद में ही हुआ था जिसमें वर्ष १९७४ में उत्तराखण्ड के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के विरुद्ध जिसमें रीनी गांव चमोली गढ़वाल की औरतों के समूह ने वनों के कटान को लेकर बहिष्कार किया था। यही बहिष्कार एक एतिहासिक घटना के रूप में "चिपको आन्दोलन" के नाम से विख्यात हुआ।

जनपद का अधिकतर हिस्सा मध्य हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं पर बसे होने के कारण जनपद की जलवायु समुद्रतल से ऊंचाई पर निर्भर करती है । अक्तूबर से मार्च तक का समय इस जनपद में सर्दियों का मौसम रहता है । सर्दियों में जनपद का मौसम अत्यधिक ठण्डा रहता है, ऊंचाई वाले स्थानों पर सर्दियों में हिमपात होता है तथा कई ऊंची चोटियां नवंम्बर से अप्रैल तक अत्यधिक हिमपात के कारण निर्जन तथा अन्य क्षेत्रों से कटी रहती हैं। गर्मियों में जनपद का मौसम सुहावना रहता है फिर भी ऊनी कपड़े पहनने की आवश्यकता बनी रहती है। जनपद का अधिकतम तापमान ३४ डिग्री०से० तथा न्यूनतम तापमान शून्य तक चला जाता है। पूरे जनपद में तापमान ऊंचाई के साथ साथ बदलता रहता है। रुद्रप्रयाग जनपद की तरह  चमोली जनपद भी पूरी तरह से पर्वतीय श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है अत: जनपद में मानसून धारायें घाटी के माध्यम से प्रवेश करती हैं तथा जून से सितंबर तक भारी वर्षा करती हैं। जनपद की मुख्य फसलों में गेहूं, मक्का, मण्डुवा, झंगोरा, चावल, भट्ट, सूंठा, अरहर, लोबिया, मसूर, उड़द प्रमुख हैं।

आवागमन के मुख्य साधनों में दिल्ली-कोटद्वार तथा दिल्ली-ऋषिकेश राजमार्ग से उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसें चमोली जनपद के सभी पर्यटकस्थलों तथा तीर्थस्थलों तक यातायात को सुगम बनाती हैं। इसके आलावा गढ़वाल मोटर्स ओनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयू लि.), टिहरी गढ़वाल मोटर्स ओनर्स यूनियन लिमिटेड (टीजीएमओयू लि.), यातायात और परिवहन विकास सहकारी संघ लि०, रूपकुण्ड ट्रैवल्स लि०, सीमान्त सहकारी संघ लि० की बसें नियमित रूप से जनपद को देहरादून, उत्तरप्रदेश, दिल्ली व उत्तराखण्ड के अन्य जनपदों से जोड़ती हैं। जनपद के सभी मुख्य नगरों में टैक्सी यूनियन भी हैं जो कि वर्ष भर निरंतर पर्यटकों का आवागमन आसान करती हैं। चमोली जनपद का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन गोपेश्वर से लगभग २०४ किमी० कि दूरी पर ऋषिकेश में स्थित है । जनपद का निकटतम एअरपोर्ट जौलीग्रांट देहरादून स्थित है जो कि गोपेश्वर से लगभग २०४ किमी० की दूरी पर स्थित है ।

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