Sunday October 21, 2018
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राजराजेश्वरी मंदिर, रणिहाट श्रीनगर

राजराजेश्वरी मंदिर, रणिहाट श्रीनगर
राजराजेश्वरी मंदिर, रणिहाट श्रीनगरराजराजेश्वरी मंदिर, रणिहाट श्रीनगरराजराजेश्वरी मंदिर, रणिहाट श्रीनगर
राजराजेश्वरी, रणिहाट, श्रीनगर गढ़वाल

श्रीनगर एस०एस०बी कैम्पस के ठीक सामने गंगापार अलकनन्दा के दांयें किनारे पर २०० फीट ऊंची चट्‌टान पर रणिहाट नामक स्थान है, जहां पर राजराजेश्वरी देवी का बहुत प्राचीन तथा विशाल मंदिर है। मन्दिर की ऊंचाई लगभग ३० फीट है तथा इस मन्दिर में मुख्य मूर्ति भगवती की है। इसके मण्डप की छत विशेष रुप से अपने वृहदाकार, भार एवं भौली से ध्यान आकृष्ट कराती है। वास्तुविदों ने इसे फंसाण का नाम दिया है। नीचे से आठ विशाल प्रस्तर स्तम्भ इसके आधार और टिकाव को मजबूती प्रदान करते है। इस मन्दिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सोये हुये शंकर की नाभि पर चतुर्भुजी रूप में मां राजराजेश्वरी (देवी पार्वती) पद्‌मासन मुद्रा में विराजमान हैं। इसके पीछे लाल पर्दे के पीछे देवी की विशाल शिला मूर्ति है, जिसके दर्शन पूर्णतया वर्जित हैं।
मन्दिर के आसपास कई छोटे बड़े मन्दिर हैं जिन्हे देवकुल कहते हैं। इतिहासकार डा० शिव प्रसाद नैथानी के अनुसार पुरातात्विक विश्लेषण से सिद्ध हुआ है कि रणिहाट के मंदिर ८वी शताब्दी के है। तथा मंदिर में रखी मूर्तियॉ ८वी शताब्दी के बाद की है। राजेश्वरी मंदिर के उत्तरी दीवार के भित्ति में टिकाकर खड़ी महिषासुर मर्दिनी की पाषाण मूर्ति ११वीं शताब्दी की है। राजेश्वरी के निकट ही एक १० फीट ऊंचा रथमंदिर विद्द्यमान है। जिसे कोई निरंकार/झलंकार तो कोई शिवमंदिर कहता है। इसमें कोई सभामण्ड़प नहीं है परन्तु अन्य छोटे मंदिरों के समान अन्तराल की प्रवृत्ति है। राजेश्वरी मंदिर के मण्ड़प में पूर्वी भित्ति पर टिकाकर रखी है 'नृवाराह मूर्ति`। तीन फीट लम्बी इस मूर्ति में विष्णु का बारह अवतार इसमें शेषनाग पर पैर टिकाकर जिस तरह बायें हाथ व घुटने के सहारे भूदेवी को उठाये उद्वार कर रहा है, वह भाव प्रशंसनीय है। मूर्ति से पत्थर से ही आभास होता है कि यह मूर्ति महिषासुर मर्दिनी से भी ३-४ सौ साल पुरानी है।
नवरात्रों और चैत्रमास में यहां विशेष पूजा होती है। पुराने समय में यहां देवदासी प्रथा थी। अनेक देवनारियां मन्दिर में देवी भगवती की पूजा अर्चना करती थीं। शाक्त परंपरा का यह श्रीनगर का सबसे बड़ा मन्दिर है। मन्दिर के अन्दर तथा बाहर अनेक मूर्तियां तथा अवशेष हैं जिससे इसकी प्राचीनता का अनुमान लगाया जा सकता है।



फोटो गैलरी : राजराजेश्वरी मंदिर, रणिहाट श्रीनगर

Comments

1

Arvind Kukreti | November 15, 2017
Koi Sjjan Mujhe Mata Raj Rajeshwari Mandir Ke Pandit Jee Ka No Dega

2

Rajender singh rawat | January 27, 2017
Jai ma rajrajeshwari

3

BHARAT SINGH RAWAT | May 01, 2015
Jai Badri Kedar Mata ka mandir ati sunder h

4

पारेश्वर प्रसाद नौटियाल | October 25, 2013
मैं वर्ष २००९ में एक बार यहां गया था, एक बार फिर से जाने की हार्दिक इच्छा है... अतुल्य एवं अद्‌भुत.. एतिहासिक पाषाण कारीगरों की कारीगरी तथा कार्यकुशलता का अद्भुत संगम है रनिहाट

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