Monday February 26, 2018
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लक्ष्मीनारायण मन्दिर, बुवाखाल रोड़ पौड़ी

लक्ष्मीनारायण मन्दिर, बुवाखाल रोड़ पौड़ी
लक्ष्मीनारायण मन्दिर, बुवाखाल रोड़ पौड़ीलक्ष्मीनारायण मन्दिर, बुवाखाल रोड़ पौड़ीलक्ष्मीनारायण मन्दिर, बुवाखाल रोड़ पौड़ी
लक्ष्मीनारायण मन्दिर पौड़ी गढ़वाल

बस स्टेशन पौड़ी से कुछ ही दूरी पर स्थित "लक्ष्मीनारायण मन्दिर" की स्थापना १४-फरवरी-१९१२ संक्रान्ति पर्व पर की गई थी। इस मन्दिर में स्थापित लक्ष्मी और नाराय़ण की मूर्ति सन्‌ १९१२ पूर्व विरह गंगा की बाढ़ आने के उपरान्त श्रीनगर राज दरबार से लाकर यहां स्थापित की गयी थी। जिनमें हनुमान जी तथा गणेश जी की मूर्ति पत्थर की है। इसी मन्दिर परिसर में शिवलिंग भी स्थापित है। यह शिवलिंग जिला चिकित्सालय पौड़ी के निर्माण के समय भूमि खुदान के समय चट्‌टान से प्राप्त हुआ था। मन्दिर की स्थापना के बारें में पुजारी श्री विनोद बहुगुणा के अनुसार लगभग १९५० के वर्ष में एक एक सिद्ध महात्मा इस मन्दिर में आये और जिस स्थान पर शिवलिंग स्थापित है उस स्थान पर अपना त्रिशूल गाढ़कर छह माह के अन्दर शिवलिंग की स्थापना की बात कहा कर चले गये। उनके जाने के बाद जिला चिकित्सालय की भूमि की खुदाई में यह शिवलिंग प्राप्त हुआ जिसकी स्थापना यहां लक्ष्मीनारायण मन्दिर के परिसर में की गई। उन सिद्धमहात्मा का वह त्रिशूल आज भी मन्दिर में स्थापित है।
मान्यता है कि सन्‌ १८२० में सिद्ध महात्मा सरजू भैया ने इस स्थान पर विश्राम किया था। मन्दिर प्रांगण के बायीं ओर एक जल स्रोत है, कहा जाता है कि यह जलस्रोत भी उन्ही सिद्ध महात्मा जी के चिमटे से ही उद्गमित हुआ है जिसका लाभ भक्तजन आज भी उठा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस स्थान पर यह मन्दिर विराजमान है वह भूमि पौड़ी गांव के दानदाताओं जसपाल सिंह नेगी, पदमेन्द्र नेगी, स्व० लक्ष्मण सिंह (ब्रिगेडियर साहब) तथा रौथाण बन्धुओं ने दान स्वरूप मन्दिर को उपलब्ध कराई थी। कहा जाता है कि सन्‌ १९१२ से १९६२ तक बद्रीनाथ मन्दिर से इस मन्दिर को एक तोला केसर, एक किलोग्राम चन्दन, एक रूपया दूध आदि के लिये, भगवान के वस्त्र पार्सल द्वारा नियमित रूप से प्रदान होते थे। इसी प्रकार जम्मू के कर्णराजा सन्‌ १९५५ से १९७२ तक दस रूपये महीने पुजारी के लिये भेजते थे। परन्तु अब मन्दिर की अर्थव्यवस्था पूर्णतया दान पर ही निर्भर है। जिसमें स्थानीय दानी दाताओं की सक्रिय भूमिका रहती है। समय समय पर इस मन्दिर में धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। वर्ष भर यह मन्दिर भक्तों हेतु खुला रहता है।

साभार : वीरेन्द्र खंकरियाल [पौड़ी और आस पास]



फोटो गैलरी : लक्ष्मीनारायण मन्दिर, बुवाखाल रोड़ पौड़ी

Comments

1

praveen rawat | September 26, 2013
jai dev bhumi jai uttarakhand

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